जब नये साल का सूरज उगे to..कुछ ऐसा हो...की बिला जाये अँधेरा ज़िंदगी का.. सूरज की रश्मि जब यौवन पर आये to जवान हो जाएं हमारी आकाक्षाएँ hआर हाथों मी काम हो..सबकी सजीली शाम हो
नया साल kuchh इस तरह हो नया..
रविवार, ३० दिसम्बर २००७
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